शिव सा बनना है…

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शिव सा बनना है… शिव सा प्रगाढ़, और धैर्यवान, शिव सा बलिष्ठ और शांतचित्त शिव जैसा सौम्य, और मेधावी शिव सा योगी उन सा ज्ञानी शिव सा बनना है… उस वैरागी के नाम डाल व्यसनों को नहीं पालना है गुण-परिस्थितियों में अंतर कर चुनना है वह, व्यावहारिक जो हाँ, नहीं चाहिए भाँग औ भस्म जब विषपान डराता हो बढ़ना है …

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सनातन ज्ञान बनाम आधुनिक भक्ति

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अभी रास्ते में बज रहे भजन सुन रही थी। मन में सहसा विचार आया कि वह ज्ञान, जो सदियों तक श्रव्य रूप में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को दिया जा रहा था, कहाँ गया? अब भजन और आरतियाँ तो होती हैं, पर उनमें कथाएँ या ‘ज्ञान’ नहीं है। उदाहरण के लिए, यह गीत देखिये – क्या कहना चाहती हैं …

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सौ-सौ सिंहों से तुम बलशाली?!

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नवरात्रि की संध्या-वंदना चल रही थी। दुर्गा माँ की आरती शुरू हुई, पर ‘सौ-सौ सिंहों से तुम बलशाली‘ पर आते-आते मेरा मन पूजाघर से कहीं दूर जा चुका था। सौ-सौ सिंहों से तुम बलशाली?! उसी विचारावेग को शब्दों का रूप देने का एक प्रयास है यह पोस्ट। एक तरफ हम गाते हैं “सौ-सौ सिंहों से तुम बलशाली”, दूसरी ओर खुद …

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नीम का पेङ

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ग्यारहवीं कक्षा में थी मैं उस समय। तब हम लोग जसपुर में रहते थे। छोटा सा कस्बा है उत्तराखंड में, पर मैदानी इलाके में ही आता है – उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर। उत्तराखंड में बिजली की व्यवस्था अच्छी थी, इसलिए हम वहाँ रहते थे, पापा का कॉलेज तो यू. पी. में ही पड़ता था। हर स्थानीय खेल …

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