होली विशेष – हिन्दी शब्दावली

Shivanshi Srivastava India Leave a Comment

चाहे आप भारत में रहते हों या विदेश में, होली के अनोखे त्यौहार को भूल पाना किसी भारतीय के लिए संभव नहीं है। प्रांत और क्षेत्र के अनुसार इस त्यौहार का नाम और मनाने का तरीका बदलता रहता है, पर उल्लास हर जगह एक सा ही होता है। यदि आपको लगता है कि आप होली से सम्बंधित सभी शब्दों से परिचित हैं, तो आप गलत भी हो सकते हैं।

हमारी शब्दावली शृंखला के इस होली-विशेषांक को पढ़कर आप खुद को अंक दीजिये और कमेंट बॉक्स में पूरी ईमानदारी से बताइये कितने शब्दों या उनके उद्गम से आप अनभिज्ञ थे।

  1. होलिका दहन (छोटी होली)

भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार होली के आरम्भ होने की कथा –

होलिकाराजा हिरण्यकश्यपु की बहन थी। उसको वरदान में एक ऐसी चुनरी मिली हुई थी, जिसको पहनने से आग (अग्नि) उसको कोई क्षति नहीं पहुंचा पाएगी। राजा हिरण्यकश्यपु का पुत्र प्रहलाद भगवान् विष्णु की उपासना करता था, जो कि राज्यवासियों के लिए वर्जित था। प्रह्लाद को मारने के लिए होलिका वरदान में मिला हुआ वह वस्त्र पहनकर, प्रहलाद को गोदी में ले कर अग्नि पंडाल में प्रवेश कर गयी। पर तेज हवा और भगवान् कि कृपा के कारण वह चुनरी होलिका से प्रहलाद पर पहुँच गयी और होलिका वहीं जलकर मर गयी। पहली होली इसी ख़ुशी में मनाई गयी थी।

आधुनिक समय में प्रतीक-स्वरुप होलिका को जलाया जाता है और ‘होलिका दहन’ से ही होली की शुरुआत होती है। चूंकि इसको होली मनाने से पहले मनाया जाता है, इसका एक प्रचलित नाम छोटी होली भी है।

  1. होली

‘होली’ शब्द ‘होलिका’ से ही बना है। इसको हम रंगों का त्यौहार, फगुआ और दोल आदि नामों से भी मनाते हैं। भारत और नेपाल में होली का विशेष महत्व है।

  1. धुलेंड़ी

प्राचीन समय में होली मुख्य रूप से धूल से खेली जाती थी, जो कि कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी किया जाता है। धुलेंड़ी शब्द ‘धूल’ से ही बना है। यह शब्द होली खेलने के लिए इस्तेमाल होता है।

  1. हुरियार

हुरियार ‘होलियार’ शब्द का अपभ्रंश है और इसे होली खेलने वाले लोगों के लिए प्रयोग किया जाता है।

  1. गुलाल

गुलाल सूखे रंग के लिए प्रयोग किया जाने वाला नाम है। पुराने समय में चन्दन, गुड़हल और अन्य ऐसे प्राकृतिक तत्वों को पीसकर बनाया जाता था। आज भी होली खेलने में गुलाल का  काफी इस्तेमाल होता है।

  1. अबीर

अबीर को प्रायः गुलाल में मिला कर होली खेली जाती है। यह अभ्रक या माइका से बनता है और रंग को चमकीला बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह गीले या सूखे, दोनों रूपों में प्रयोग होता है।

  1. गुजिया

गुजिया होली पर बनाया जाने वाला सबसे मुख्य पकवान है। यह होली से पहले लगभग हर घर में बनती है। खोया, सूखे मेवे, गोला, बूरा, मैदा आदि मिला कर गुजिया को बनाया जाता है। इसकी मिठास के बिना होली आनंद में नहीं आता, ये तो आप भी मानते होंगे?

  1. भांग

‘भांग’, जो कि एक औषधीय पर नशायुक्त पौधा है, का सेवन भारतीय लोग सदियों से करते आ रहे हैं। भांग के लड्डू बनाकर, दूध में मिलाकर, ठंडाई या लस्सी के रूप में होली में बांटा जाता है।

  1. फागुन/फाल्गुन

हिंदी या भारतीय कैलेंडर के अनुसार होली फाल्गुन (या फागुन) पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। फाल्गुन हिंदी वर्ष का अंतिम माह है। होली को नए साल के स्वागत और फसल तैयार होने की ख़ुशी मनाने से जोड़ कर भी देखा जा सकता है।

  1. फाग

फाग शब्द ‘फाल्गुन’ से बना है और इसे फाल्गुन माह में गाये जाने वाले गीतों के लिए प्रयोग किया जाता है। होली के फाग पूरे देश में लोकप्रिय हैं।

  1. ढोलक

ढोलक होली पर इस्तेमाल किया जाने वाला सबसे सामान्य वाद्ययंत्र है। इसका नाम ‘ढोल’ से उद्धृत है। ढोल के विमुख, ढोलक का आकर थोड़ा छोटा होता है और इसको हाथों से बजाया जाता है।

  1. पिचकारी

गीले रंगों या पानी को तेजी से दूसरों पर फेंकने के लिए के लिए धातु (या प्लास्टिक) से बनी हुई पिचकारियों से आपने बच्चों-बड़ों सभी को खेलते देखा होगा। पिचकारी को यह नाम ‘पिचकाना’ शब्द से मिला है।

  1. कमोरी

प्राचीन समय में कलश या घड़ों को काफी दूर से भरकर घर में लाया जाता था। लोग पैदल ही कमर पर इसको रखकर यात्रा किया करते थे, जिससे इसका नाम ‘कमोरी’ पड़ा। कमोरी मिट्टी या धातु की होती है और इसे होली खेलने के लिए काफी प्रयोग किया जाता था। फिलहाल, इस शब्द और वस्तु, दोनों का प्रयोग बहुत ही कम होता है, पर लोकगीतों में अभी भी आपको ‘कमोरी’ का नाम बहुतायत में मिल जाएगा।

  1. टेसू

टेसू के फूलों को पानी में भिगाकर प्राकृतिक गीला रंग तैयार किया जाता है। अब तो प्राकृतिक रंगों की जगह बाजार में मिलने वाले अर्टिफिशियल रंगों ने ले ली है, वर्ना टेसू का गीले रंगों के रूप में कई दशकों तक प्रयोग किया गया है।

  1. ब्रज

होली की बात हो और ब्रज का नाम नहीं आये, ऐसा कभी संभव है? वृन्दावन, मथुरा, बरसाना, नन्दगाँव और गोवर्धन आदि क्षेत्रों को सामूहिक रूप से ब्रज कहा जाता है। माना जाता है आधुनिक गुलाल-अबीर वाली होली की शुरुआत राधा और कृष्ण से ब्रज में ही हुई।

SHARE ON

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *